शान से चलो !! May 21, 2009
Posted by Rakesh in Hindi, Personal, Random Ramblings.Tags: attempt
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क्यों फिक्र गिरने की जब
बादलों को छूने का हौसला है तुम में ,
बस निडर बनो और बढ़ चलो
नहीं होते परवाज़ सभी के पास,
लग जायेंगे पंख पैरों में ,
उड़ने की चाह लेकर बस उड़ चलो |
मंजिल की फिक्र किस बात की
जब रास्ते पर है तुम्हे यकीं
हर मोड़ पर मिलेगी एक नयी मंजिल
यह अभी से मान के चलो |
साथी साथ हो तो अच्छा है
साथ ना मिले तो एकला चलो |
चले हो तुम तो फिर ठोकर का डर क्यूँ !
चल दिया है तो फिर शान से चलो !!
awesome poem man!
@kunal: Thanks
haven’t written since may ?
whats up ?
It’s really good
very nice your poem,
your poem give energy to young generation